भरत का चरित्र राम के प्रति अत्यधिक समर्पण, भाईचारे और त्याग को दर्शाता है-आचार्य मनोज अवस्थी

ब्रजेश पोरवाल-एडीटर &चीफ टाइम्स ऑफ आर्यावर्त 7017774931

इटावा।सावित्री शीत ग्रह में चल रही रामकथा में आचार्य मनोज अवस्थी जी महाराज ने बताया भरत का चरित्र राम के प्रति अत्यधिक समर्पण, भाईचारे और त्याग को दर्शाता है। जब राजा दशरथ ने भरत को कैकेयी की माँग के कारण अयोध्या का सिंहासन सौंपा, तो भरत ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर, दिया और राम की अनुपस्थिति में राज्य का कार्यभार संभालने से मना कर दिया। उन्होंने चित्रकूट जाकर राम से मिलकर राज्य वापस करने की विनती की, लेकिन राम ने लौटने से मना कर दिया, जिसके बाद भरत ने राम की खड़ाऊं को सिंहासन पर स्थापित कर दिया और खुद उनकी जगह बारह वर्षों तक राज्य का संचालन किया। यह कथा त्याग, निष्ठा और कर्तव्यपरायणता का एक आदर्श उदाहरण है।

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