थाना प्रभारी विक्रम सिंह के वैवाहिक जीवन के 23 वर्षों की प्रेरक कहानी
Suggested By – Brajesh Porwal

Written By – Nitin Dixit
इटावा: जीवन में कुछ यात्राएँ ऐसी होती हैं जो सिर्फ दो लोगों के साथ चलने का नाम नहीं होतीं, बल्कि एक-दूसरे के लिए शक्ति, सम्मान, भरोसा और हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर चलने का प्रतीक बन जाती हैं। भरथना थाना प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह और उनकी धर्मपत्नी प्रीती सिंह का वैवाहिक जीवन ऐसी ही प्रेरक कहानी है—एक ऐसा सफर जिसने आज 23 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं।

वर्दी पहनना सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि निष्ठा, साहस और समर्पण की प्रतिज्ञा है। लेकिन वही वर्दी, परिवार के लिए कभी—कभी इंतजार की परीक्षा भी बन जाती है। थाना प्रभारी विक्रम सिंह मूल रूप से गांव सपही, थाना मडियाहूं, जिला जौनपुर के रहने वाले है। इनके पिता संकटा प्रसाद एक सरकारी स्कूल प्रधानाध्यापक के पद से सेवानिवृत्त है। जोकि गांव में ही रहते हैं अध्यापक होते हुए इनके पिता ने कठिन संघर्षों के बीच अपने बेटे को संघर्षों के रास्ते पर चलने का हुनर सिखाते हुए उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।

इसी दौरान वर्ष 2001 में थाना प्रभारी विक्रम सिंह ने पुलिस फोर्स ज्वाइन की। दो वर्षों तक पुलिस में नौकरी करते हुए वर्ष 2003 में इनकी शादी जंघई जौनपुर निवासी स्व: लाल प्रताप सिंह की पुत्री प्रीती सिंह के साथ हुई। जिसके बाद शुरू हुआ फर्ज और रिश्ते निभाने का असली सफर।

थाना प्रभारी विक्रम सिंह ने पिछले 23 वर्षों में जहाँ एक ओर कानून-व्यवस्था की रक्षा का दायित्व निभाया, वहीं दूसरी ओर उन्होंने अपने वैवाहिक जीवन को भी उसी गंभीरता, ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ संभाला।
रात–रात भर ड्यूटी, अचानक मिलने वाले ऑपरेशन के आदेश, और हर मोड़ पर जोखिम भरे हालात—इन सबके बीच उन्होंने रिश्तों की गर्माहट को कभी ठंडा नहीं पड़ने दिया। संघर्षों के बीच मजबूती का स्तंभ—सहधर्मिणी,
कहा जाता है कि पुलिस की नौकरी जितनी कठिन है, उससे दोगुनी मुश्किल होती है पुलिस अधिकारी के परिवार की भूमिका। उनकी धर्मपत्नी ने भी इन 23 वर्षों में धैर्य, समझदारी और त्याग की मिसाल पेश की है। घर और परिवार की सभी जिम्मेदारियाँ संभालते हुए उन्होंने कभी भी विक्रम सिंह को उनके फर्ज से डगमगाने नहीं दिया। जहाँ जरूरत पड़ी, वह प्रेरणा बनीं… जहाँ कठिनाई आई, वह साहस बनीं… और जहाँ जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ा, वहाँ वह संबल बनकर खड़ी रहीं।
थाना प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह की कहानी—फर्ज के रास्ते पर चलते हुए रिश्तों की रक्षा की। 23 वर्षों का यह सफर आसान नहीं था। कई ऐसे पल आए जब परिवार को समय नहीं दे पाए…कई त्यौहार ड्यूटी करते हुए बीते… कई अहम अवसरों पर सिर्फ फोन कॉल ही सहारा बना… लेकिन यही तो असली खूबसूरती है उनके जीवन की— कि उन्होंने कभी भी अपने रिश्ते को पीछे नहीं छोड़ा और न ही अपने फर्ज से पीछे हटे।फर्ज निभाने में कड़ाई और रिश्ते निभाने में नरमी बस इन्हीं दोनों का संतुलन आज उनके जीवन को आदर्श बनाता है।
23 वर्षों की वैवाहिक यात्रा—सम्मान और विश्वास की नींव पर अब भी खड़ी है। इन 23 वर्षों में उनका दांपत्य जीवन सिर्फ एक रिश्ता नहीं, बल्कि एक साझेदारी रहा है— जिसमें एक ने वर्दी की मर्यादा को संभाला तो दूसरे ने परिवार की गरिमा को। दोनों ने मिलकर हर चुनौती को पार किया और हर खुशी को दोगुना बनाया।

आज जब उनके 23 वर्ष पूरे हो रहे हैं, तो यह सिर्फ एक वर्षगांठ नहीं, बल्कि उस अटूट विश्वास, प्यार और जिम्मेदारी का सम्मान है जो दोनों ने एक-दूसरे के प्रति निभाया है। प्रभारी निरीक्षक के दो बेटे अभ्युदय और आराध्य अपने पिता के मार्गदर्शन में अपने भविष्य का निर्माण कर रहे है।
थाना प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह और उनकी धर्मपत्नी का यह सफर हर उस परिवार के लिए प्रेरणा है जो कर्तव्य और रिश्तों के बीच तालमेल साधने का प्रयास करता है। यह कहानी सिखाती है कि— जहाँ प्यार हो, वहाँ संघर्ष भी सुंदर लगने लगते हैं… जहां विश्वास हो, वहाँ वर्दी और परिवार दोनों एक समान रूप से चमकते हैं।

थाना प्रभारी निरीक्षक विक्रम सिंह तथा उनकी धर्मपत्नी प्रीती सिंह को हमारी पूरी टीम की ओर से वैवाहिक जीवन के 23 वर्ष पूर्ण करने पर बहुत बहुत शुभकामनाएं। ईश्वर से प्रार्थना है कि ईश्वर आप दोनों के रिश्ते को जीवन पर्यंत खुशियों से परिपूर्ण रखें।
Suggested By – Brajesh Porwal
Written By – Nitin Dixit
