पाली खुर्द का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बदहाली का शिकार “महीनों से डॉक्टर नदारद, ग्रामीणों में आक्रोश”

ब्रजेश पोरवाल- एडीटर &चीफ टाइम्स ऑफ आर्यावर्त 7017774931

महीनों से डॉक्टर नदारद, ग्रामीणों में आक्रोश

भरथना: क्षेत्र के गाँव पाली खुर्द का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) इन दिनों बदहाली की मार झेल रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर खंडहर बनने की कगार पर यह केंद्र अब केवल एक ढांचा बनकर रह गया है। यहाँ तैनात डॉक्टर महीनों से अपनी ड्यूटी पर नहीं पहुँच रहे है. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केवल लेब टेक्नीशियन सौरभ सिंह और वार्ड आया देवांशी के सहारे ही टिका हुआ है, जिससे पाली खुर्द गाँव के साथ साथ आस पास गावं के सैकड़ों ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीमारियों के इलाज के लिए उन्हें मजबूरी में कई किलोमीटर दूर शहर का रुख करना पड़ रहा है।

बीते रविवार को आरोग्य मेले के दिन मरीजों का उपचार तो दूर की बात अस्पताल में चारों तरफ गंदगी नजर आई. साथ ही तैनात डॉक्टर भी मौके पर नही मिले. ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर साहब महीनों बीत जाने के बाद भी इस स्वास्थ्य केंद्र की सुध नहीं लेते है. मरीज आस लगाकर यहाँ पहुंचता है किन्तु डॉक्टर के नदारद होने से यहाँ मरीजों को देखने वाला कोई नहीं होता है. जिससे मरीज निराश होकर वापस लौट जाते है.

बिना डॉक्टर किस काम का स्वास्थ्य केंद्र?
स्वास्थ्य केंद्र पर न तो डॉक्टर हैं, न स्टाफ उपलब्ध हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार आपातकालीन स्थितियों में, जब समय पर इलाज जरूरी होता है, तो मरीजों को निजी अस्पतालों में ले जाना पड़ता है, जहां महंगे इलाज का बोझ उन पर अलग से पड़ता है। कई ग्रामीणों ने बताया कि कई बार समय पर इलाज न मिलने से हालात बिगड़ चुके हैं. कई बार शिकायत होने के बाद भी केंद्र पर तैनात डॉक्टर का रवैया ज्यों का त्यों बना हुआ है.

सरकारी दावों की खुलती पोल
सरकार भले ही गाँव-गाँव स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावे करती हो, लेकिन पाली खुर्द का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उन दावों की पोल खोल रहा है। सरकारी रिकॉर्ड में यहाँ डॉक्टरों की नियुक्ति दिखाई जाती है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयान कर रही है। ग्रामीणों की माने तो डॉक्टर साहब महीनो बीते जाने के बाद भी यहाँ नहीं पहुँचते है. ना ही कोई सम्बंधित स्वास्थ्य कर्मी यहाँ पहुंचता है जो मरीजों का उपचार कर सके. उन्हें दवाइयां दे सके. अस्पताल में डॉक्टर ना होने से ग्रामीण काफी परेशान है.

ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
पाली खुर्द के निवासी महीनों से जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। गावं के पूर्व प्रधान रनवीर सिंह तथा ग्रामीण रामगोपाल, सुरेश चन्द्र, अविनाश, मुलायम सिंह, राकेश ने संयुक्त रूप से जानकारी देते हुए बताया कि हमारे गावं का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जहां लोग कई गाँवों से इलाज के लिए आते है. केंद्र पर कई महीनों से डॉक्टर नहीं आ रहे है. और ना ही कोई जिम्मेदार स्वास्थ्य कर्मी उपलब्ध रहता है जो मरीजों का उपचार कर सके. हमने कई बार शिकायत की है पर हर बार केवल आश्वासन मिला। समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।

टूटी खिड़कियाँ, बुझी लाइटें और सफाई का बुरा हाल

स्वास्थ्य केंद्र बदहाली की दर्दनाक तस्वीर पेश कर रहा है। महीनों से डॉक्टरों की अनुपस्थिति से जूझ रहे इस केंद्र की अब भौतिक स्थिति भी जर्जर हो चुकी है। भवन की दीवारें जगह-जगह से टूट चुकी हैं, खिड़कियाँ भी टूटी पड़ी हैं और बिजली की लाइटें लंबे समय से खराब पड़ी हैं। सफाई व्यवस्था का भी नामोनिशान नहीं है, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य पर और भी खतरा मंडरा रहा है।खिड़कियाँ टूटी होने के कारण जानवर और गंदगी अंदर घुस जाती है, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
जहाँ एक ओर सरकार ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत सफाई पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी ओर इस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में गंदगी का आलम देखकर सरकारी दावों पर सवाल खड़े हो जाते हैं। जगह-जगह जमी धूल, जर्जर शौचालय, खुले में फेंका गया मेडिकल कचरा और दुर्गंध फैलाती नालियाँ मरीजों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई हैं

सम्बंधित अधिकारियों से नहीं हो सका सम्पर्क
जब इस संबंध में मुख्य चिकित्साधिकारी ब्रजेश कुमार से दूरभाष के जरिये संपर्क किया गया तो उनके अर्दली ने फ़ोन उठाते हुए कहा कि साहब अभी मीटिंग में मीटिंग खत्म होने के बाद बात हो सकेगी. वहीँ जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भरथना के अधीक्षक अमित दीक्षित से दूरभाष के जरिये सम्पर्क करने की कोशिश की गयी तो फ़ोन नहीं उठ सका.

ग्रामीणों की मांग
पाली खुर्द के ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि स्वास्थ्य केंद्र में जल्द से जल्द डॉक्टर, स्टाफ और दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही, भवन की मरम्मत और नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। जिससे ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान हो सके. उपचार के लिए आने वाले मरीजों को समय से उपचार मिल सके।

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