ब्रजेश पोरवाल-एडीटर &चीफ टाइम्स ऑफ़ आर्यावर्त 7017774931

इटावा।होली का त्यौहार है रंगों,उमंगों और प्रेम सद्भावना का एक दूसरे पर रंग डालने से भाईचारे व अपनापन की भावना बढ़ती है जब अपने पराए का भेद मिटाकर हम एक दूसरे को लाल , हरे , पीले और गुलाबी रंगों से रंगते है, हमें कुछ बातों पर जरूर ध्यान देना चाहिए पहली बात तो यह की होली में हुड़दंग ना हो यानी सब लोग हंसी-खुशी तथा शालीनता के साथ रंगों से खेले होली , दूसरी बात है की होली पर बिकने वाले अधिकांश रंग हानिकारक होते हैं अतः जहां तक हो सके इन कैमीकल से बने हानिकारक रगों के इस्तेमाल से बचे, दिखने में मनभावन लगने वाले इन रंगों का हमारा शरीर व स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है आओ देखें किस रंग से तुम्हें क्या नुकसान पहुंच सकता है
लाल रंग – मर्क्यूरी सल्फाइट यह त्वचा का कैंसर , काला – लेड औक्साइड यह गुर्दे का रोग , नीला – प्रूसिक एसिड यह चर्मरोग , हरा – कॉपर सल्फेड यह ऑखों को खराब , सफेद – एलुमिनियम ब्रोमाइड यह कैंसर , बैंगनी – हेवी मेटल ऑक्साइड यह रंग हड्डियों , गुर्दे , दिमाग में बुरा असर डालता हैं
प्रकृति के रंग है सबसे न्यारे
प्रकृति की हर चीजें होती न्यारी और लाभदायक बशर्ते हम उनका इस्तेमाल सूक्षबूक्ष से करें। तरह तरह के रंग हम घर पर तैयार कर सकते है और इनके प्राकृतिक गुणों से किसी प्रकार का नुकशान नही होता बल्कि शरीर व स्वास्थ को कुछ न कुछ लाभ अवश्य पहुंचाता है
पीला रंग – टेसू , गेंदा के फूलों से ,
लाल,नारंगी – हरी मेंहदी से,
लाल, महावरी – चुकन्दर , अण्डी केतना से ,
पीला,जोगिया – हल्दी और चन्दन के लेप से तैयार किये जाते है।
डॉ० हरीशंकर पटेल
महामाहिम राज्यपाल द्वारा सम्मानित समाजसेवी
राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य-अपनादल (एस)
