अनर्गल वसूली व तानाशाही रवैये के खिलाफ ग्राम पंचायत व ग्राम विकास अधिकारियों का आक्रोश, डीएम को सौंपा ज्ञापन

ब्रजेश पोरवाल-एडीटर &चीफ टाइम्स ऑफ आर्यावर्त 7017774931

इटावा। उच्च अधिकारियों के तानाशाहीपूर्ण रवैये, अनर्गल वसूली और कर्मचारियों की विभिन्न समस्याओं को लेकर ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी समन्वय समिति ने सोमवार को जिलाधिकारी इटावा शुभ्रांत कुमार शुक्ला को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से सचिवों ने विभागीय उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए गंभीर शिकायतें दर्ज कराईं।

समन्वय समिति ने बताया कि जिला स्तर पर तैनात विभागीय उच्च अधिकारियों द्वारा संविदा पर रखे गए कुछ कथित दलालों और अधीनस्थ अधिकारियों के माध्यम से सचिवों से अवैध वसूली की जा रही है। कभी हवन के नाम पर, कभी अधिकारी की विदाई, तो कभी मंत्री के आगमन के नाम पर प्रति पंचायत या प्रति सचिव दो हजार से पांच हजार रुपये तक की मांग की जाती है। सचिवों का आरोप है कि रकम न देने या विरोध करने पर उनकी पंचायतों की जांच लगाकर दबाव बनाया जाता है।

सचिवों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ग्राम पंचायतों के लगभग सभी कार्य ऑनलाइन हैं, जिन्हें कोई भी आम नागरिक देख सकता है, ऐसे में बिना कार्य के भुगतान की कोई संभावना नहीं है। इसके बावजूद जांच और वसूली का भय दिखाकर उत्पीड़न किया जा रहा है। सचिवों ने यह भी बताया कि परिवार रजिस्टर, नाली-खरंजा, हैंडपंप, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, फैमिली आईडी जैसे अनेक कार्य ग्राम स्तर पर वही करते हैं, फिर भी भरथना तहसील के ब्लॉक महेवा और भरथना में सचिवों को बीएलओ ड्यूटी पर परेशान करने की नीयत से लगाया गया है, जिससे न तो पंचायत कार्य ठीक से हो पा रहे हैं और न ही निर्वाचन संबंधी जिम्मेदारियां।

इसके अलावा गौशालाओं की जांच के नाम पर भी सचिवों को लगातार परेशान किए जाने का आरोप लगाया गया। विकास खंड भरथना में तैनात लिपिक अश्वनी कुमार पाल पर कर्मचारियों से अवैध वसूली जारी रखने का भी आरोप लगाया गया। सचिवों ने बताया कि फैमिली आईडी लगभग सभी ग्रामवासियों की बन चुकी है, केवल वे लोग शेष हैं जो बाहर रहते हैं या आधार व ओटीपी देने को तैयार नहीं हैं, इसके बावजूद फैमिली आईडी के नाम पर वेतन रोके जाने की कार्रवाई की जा रही है।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि शौचालयों की सूचियां ब्लॉक कोऑर्डिनेटर द्वारा बिना सचिव के हस्ताक्षर के ही तैयार कर सीधे लाभार्थियों में बांटी जा रही हैं, लेकिन जांच के समय दोष सचिवों पर मढ़ दिया जाता है। खंड विकास अधिकारियों पर भी मनमाने ढंग से कार्रवाई करने और लक्ष्य पूरा न होने पर अलग से दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। महेवा के बीडीओ पर कुछ सचिवों को टारगेट कर कार्रवाई करने का भी आरोप लगाया गया।

समन्वय समिति ने चेतावनी दी है कि यदि जिलाधिकारी द्वारा भी उनकी समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो दोनों संवर्गों के सभी सचिव कलमबंद हड़ताल और धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। ज्ञापन की प्रतियां खंड विकास अधिकारी से लेकर मुख्य सचिव और माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश तक को भेजी गई हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *