ब्रजेश पोरवाल-एडीटर &चीफ टाइम्स ऑफ आर्यावर्त 7017774931

भरथना।ओमश्री पागलबाबा गंगासागर धाम में चल रहे धार्मिक महोत्सव के दौरान शनिवार की रात को विशेष कार्यक्रम के तहत अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें ख्यातिप्राप्त कवियों ने गीत, गज़ल आदि रचनाएं सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।

मां सरस्वती की वंदना से शुरू हुए कवि सम्मेलन में
राजस्थान के प्रतापगढ़ से आई कवियत्री सुमित्रा सरल ने “छोटा सा दिल कहीं फरार हो गया, अब आ गया यकीन मुझे भी प्यार हो गया…गीत सुनाकर खूब तालियां बटोरी। इंदौर से आए गीतकार राजू चौरसिया ने ” हिंदू मुस्लिम दो दिल एक जान हो जाए, दुनिया से सबसे प्यारा हिंदुस्तान हो जाए। राम का मंदिर बना, कृष्ण का बन जाएगा, विश्व में विश्वनाथ का परचम लहरायेगा आदि गीत, मुक्तव सुनाकर वाह वाही बटोरी l
ललितपुर से आए करुण रस के कवि वीरेंद्र विद्रोही ने “कैसे पलेंगे बच्चे अगर खेतियां ना हो, वो घर नहीं घर जहां बेटियां ना हो.. सुनाकर वाह वाही ली। झांसी से पधारे व्यंग्यकार हरनाथ सिंह चौहान ने ” वो बोली इतिहास यहां पर मैं भी तो गढ़ सकती हूं, नारी अस्मिता के दुश्मन की छाती पर चढ़ सकती हूं, टुकड़े टुकड़े किए गए जब श्रद्धा और साक्षी के, कहां गई वो जो कहती थी लड़की हूं, लड़ सकती हूँ…सुनाने के अलावा व्यवस्था पर चोट मारते व्यंग सुनाकर लोगों को खूब गुदगुदाया।
भोपाल से आई कवियत्री नीलम राठौर ने “आप सब से मिलकर ऐसा लगा, परदेश में कोई मिल गया कोई अपना कोई पराया.. के अलावा गीत मुक्तव सुनाए। छतरपुर के कवि अभिषेक अरजरिया ने ” नहीं जयचंद्र सा करना किसी गौरी को आमंत्रित, जहां जन्मे हो खेले हो वो हिंदुस्तान मत बेचो.. सुनाकर वाहवाही ली। हरदा से आए व्यंग्यकार मुकेश शांडिल्य ने “संबंधों को यार निभाना पड़ता है, बीबी के भी पांव दबाना पड़ता है..सुनाया लोगो को खूब हंसाया।
कवि सम्मेलन का संचालन कर रहे उज्जैन से आए
कवि पं अशोक नागर ने ” वो दंगों का आगजनी का खेल नहीं चलने देगा, तुम तुलसी को रविदास से अलग नहीं कर पाओगे, वो सनातनी में।तनातनी का खेल नहीं चलने देगा.. सुनाकर जमकर तालियां बटोरी।
कवि सम्मलेन के दौरान पीठाधीश्वर श्याम सुन्दर चौरसिया, पूर्व पालिकाध्यक्ष मनोज पोरवाल, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनोज यादव बंटी, आर एन दुबे, आंसू चौरसिया, गुड्डू चौरसिया, अरविंद चौरसिया आदि संभ्रांतजन मौजूद रहे।
