शीतलहर का प्रकोप, अरहर-चना काले पड़े पाले और कोहरे से फसलों पर संकट, कृषि विभाग से सर्वे की मांग

ब्रजेश पोरवाल-एडीटर &चीफ टाइम्स ऑफ आर्यावर्त 7017774931

महेवा
महेवा ब्लाक में कड़ाके की ठंड और पाले ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ग्राम पंचायत अंदावा एवं टकरुपुर यमुना नदी किनारे शीतलहर के प्रकोप से फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। सुबह के समय खेतों में पाले की सफेद चादर जमी हुई दिख रही है, जिससे दलहन और तिलहन की फसलें प्रभावित हो रही हैं।


टकरुपुर क्षेत्र के किसानों के अनुसार, इस कड़ाके की ठंड और पाले से कई प्रमुख फसलें प्रभावित हुई हैं। सरसों में फूल झड़ने और फलियों में दाना न बनने की समस्या सामने आ रही है। वहीं, अरहर और चने के पौधे पाले के कारण काले पड़ गए हैं। आलू की फसल में भी पिछैती झुलसा और पाले के कारण पैदावार में कमी की आशंका जताई जा रही है।ग्राम पंचायत टकरुपुर के मजरा कछपुरा के किसान अनिल कुमार दोहरे,प्रमोद कुमार और अनिल दोहरे ने बताया कि सुबह के समय खेतों में पाला इतना अधिक गिर रहा है कि वह बर्फ जैसा दिखाई देता है। किसान आशाराम कठेरिया और शैलेन्द्र अग्निहोत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मौसम का यही रुख रहा, तो फसलों की लागत निकालना भी मुश्किल हो जाएगा। नन्दगवां के किसान चन्द्रभूषण चौहान गुड्डू,दीपू चौहान और अमित सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि कृषि विभाग के विशेषज्ञ खेतों का सर्वेक्षण करें। उन्होंने किसानों को इस प्राकृतिक आपदा से बचाव के उपाय सुझाने की अपील की है।
जनता कालेज बकेवर के कृषि विशेषज्ञ डा ए के पांडेय ने पाले से बचाव के लिए किसानों को कुछ उपाय सुझाए हैं। उनके अनुसार, शाम के समय खेतों की उत्तर-पश्चिमी मेड़ पर कूड़ा-करकट जलाकर धुआं करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, फसलों में हल्की सिंचाई करने से मिट्टी का तापमान स्थिर बना रहता है, जिससे पाले का असर कम होता है। यमुना नदी के किनारे बैसे भी कोहरा ज्यादा जल बाष्पन से रहता है।

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