भाईदूज पर जेल में उमड़ा प्यार और अपनापन, बहनों ने भाइयों की सलामती के लिए की दुआ

ब्रजेश पोरवाल-एडीटर &चीफ टाइम्स ऑफ आर्यावर्त 7017774931

जिला कारागार इटावा में पर्व की छाई रही रौनक, 342 बहनों ने 203 बंदियों से की मुलाकात

इटावा। भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक भाईदूज का पर्व गुरुवार को जिला कारागार इटावा में बेहद सादगी और भावनाओं से भरे माहौल में मनाया गया। कारागार परिसर इस खास दिन पर मानो परिवारिक मिलन स्थल बन गया, जहां दीवारों के पार बिछड़े भाई-बहन एक बार फिर आमने-सामने आए और आंखों की नमी ने सब कुछ बयां कर दिया।

भाईदूज पर्व को लेकर कारागार प्रशासन की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं। मुलाकात के लिए आने वाली बहनों को किसी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए जलपान, छांव व बैठने की व्यवस्था पहले से ही की गई थी। कारागार परिसर में टेंट लगाए गए थे ताकि धूप से राहत मिल सके, वहीं बैठने के लिए कुर्सियों की पर्याप्त व्यवस्था की गई थी।

स्थानीय पुलिस प्रशासन और जेल कर्मियों द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मुलाकातें सुचारू रूप से संचालित करने के लिए पूरे कार्यक्रम को सात बैचों में विभाजित किया गया था।

जेल प्रशासन के अनुसार, कुल 07 बैचों में 342 बहनों और उनके साथ आए 114 बच्चों ने 203 बंदियों से मुलाकात की। इन मुलाकातों के दौरान भावुक दृश्य देखने को मिले — कोई बहन अपने भाई की सलामती के लिए तिलक लगाते हुए आंसू पोंछ रही थी, तो कहीं भाई अपनी बहन के हाथों से राखी की तरह मिठाई का स्वाद चख रहा था।

जेल के अंदर भी हुई दो विशेष मुलाकातें
कारागार में निरुद्ध दो बंदियों की उनकी बहनों से, जो स्वयं कारागार में निरुद्ध हैं, विशेष रूप से मुलाकात कराई गई। इस पहल ने पर्व को और भी भावनात्मक बना दिया।

पर्व को सफल बनाने में कारागार अधीक्षक सहित समस्त जेल कर्मियों की सक्रिय भूमिका रही। उनके निर्देशन में यह सुनिश्चित किया गया कि हर बहन अपने भाई से सुरक्षित और सहज माहौल में मुलाकात कर सके।

इस अवसर पर जेल परिसर में मानो रिश्तों का मेला लग गया। दीवारों के भीतर और बाहर से आती भाई-बहन की हंसी और आंसू के संग यह पर्व प्यार, उम्मीद और रिश्तों के अटूट बंधन का सजीव उदाहरण बन गया।

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