
ब्रजेश पोरवाल-एडीटर &चीफ टाइम्स ऑफ आर्यावर्त 7017774931
भरथना।क्षेत्र के रमायन गांव स्थित प्राचीन शिवमंदिर परिसर में स्वामी प्रेमानंद जी महाराज के सानिध्य में चल रही नौ दिवसीय शिव महापुराण कथा के सातवें दिन बुधवार को द्वादश ज्योतिर्लिंगों की उत्पत्ति व महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया गया।
स्वामी जी ने सोमनाथ से लेकर रामेश्वरम तक देश के विभिन्न भागों में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पवित्र स्थलों पर भगवान शिव चैतन्य रूप में विराजमान हैं और श्रद्धा से दर्शन करने मात्र से पापों का क्षय होता है। उन्होंने प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की विशेषता बताते हुए भक्तों को आध्यात्मिक संदेश दिया।
कथा के दौरान त्रिपुरासुर वध का प्रसंग सुनाते हुए स्वामी जी ने बताया कि भगवान शिव ‘त्रिपुरारि’ कैसे कहलाए। उन्होंने इसे मानव जीवन से जोड़ते हुए समझाया कि त्रिपुरासुर हमारे भीतर के काम, क्रोध और लोभ जैसे तीन विकारों का प्रतीक है, जिनका अंत भक्ति और शिव स्मरण से ही संभव है।
स्वामी प्रेमानंद जी ने कहा कि संसार के कण-कण में शिव व्याप्त हैं। जब मनुष्य अपने भीतर झांकता है, तो उसे काशी और कैलाश अपने ही हृदय में मिलते हैं।
इस दौरान भजन संध्या में गायक पवन, ऑर्गन पर नितिन, तबले पर हर्ष और पैड पर अमित ने संगत दी। कथा पंडाल में परीक्षत निमित देव अवस्थी, रोमा अवस्थी, यज्ञपति अखिलेश उपाध्याय, किरन उपाध्याय सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
आयोजन की व्यवस्थाओं में समिति अध्यक्ष अरविंद पोरवाल, गौरव मिश्रा, रजनीश उपाध्याय, अनिल श्रीवास्तव, उमेश चंद्र शाक्य, राजेन्द्र सिंह, रामजी उपाध्याय आदि सक्रिय रूप से जुटे रहे।
