बोर्ड परीक्षा के तनाव से मुक्ति और स्मरण शक्ति में वृद्धि का प्राकृतिक उपाय: योग और ध्यान

ब्रजेश पोरवाल-एडीटर &चीफ टाइम्स ऑफ आर्यावर्त 7017774931

आज का विद्यार्थी वर्ग अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, मोबाइल-इंटरनेट और ऊँची अपेक्षाओं के बीच जी रहा है। बोर्ड परीक्षाओं का समय आते ही बच्चों के मन में भय, घबराहट, अनिद्रा और आत्मविश्वास की कमी देखने को मिलती है। यह मानसिक दबाव न केवल पढ़ाई पर असर डालता है, बल्कि उनके स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। ऐसे समय में योग और ध्यान विद्यार्थियों के लिए संजीवनी के समान हैं।
परीक्षा के दौरान विद्यार्थी लगातार परिणाम की चिंता करता है। मन भविष्य में भटकता रहता है — “क्या होगा?”, “अंक कम आए तो?” यही विचार तनाव और भय को जन्म देते हैं। इससे मस्तिष्क की एकाग्रता कम हो जाती है और याद किया हुआ विषय भी भूलने लगता है।
विद्यार्थियों के लिए लाभकारी योगासन
वज्रासन – पढ़ाई के बाद करने से पाचन सुधरता है और मन स्थिर होता है। भुजंगासन – मस्तिष्क में रक्तसंचार बढ़ाकर स्मरण शक्ति को बढ़ाता है। ताड़ासन – आत्मविश्वास और एकाग्रता में वृद्धि करता है। पद्मासन – ध्यान के लिए सर्वोत्तम आसन है।
प्राणायाम श्वास-प्रश्वास को नियंत्रित कर मस्तिष्क को शांति देता है। अनुलोम-विलोम – चिंता, घबराहट और मानसिक थकान को दूर करता है। भ्रामरी प्राणायाम – परीक्षा-भय और अनिद्रा में अत्यंत लाभकारी है। स्मरण शक्ति और मानसिक ऊर्जा को बढ़ाता है।
ध्यान का अर्थ है मन को वर्तमान क्षण में स्थिर करना। प्रतिदिन 10–15 मिनट का ध्यान करने से विचारों की चंचलता कम होती है, याद करने की क्षमता बढ़ती है, आत्मविश्वास विकसित होता है, नकारात्मक सोच दूर होती है। ध्यान करने वाला विद्यार्थी विषय को समझकर पढ़ता है, रटता नहीं। यही सफलता का वास्तविक मंत्र है।
योग मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाता है। जब मन शांत होता है, तब ज्ञान स्थायी रूप से संग्रहित होता है। तनाव-मुक्त मस्तिष्क ही अधिक जानकारी ग्रहण कर सकता है। इसीलिए प्राचीन गुरुकुल परंपरा में योग और अध्ययन साथ-साथ चलते थे।

योग और ध्यान कोई चमत्कार नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और प्राकृतिक उपाय हैं, जो विद्यार्थियों को तनाव-मुक्त, एकाग्र और स्मरण-शक्ति से भरपूर बनाते हैं। यदि विद्यार्थी योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें, तो परीक्षा केवल एक अवसर बन जाएगी, बोझ नहीं।
परीक्षा केवल विद्यार्थी की स्मरण शक्ति की नहीं, बल्कि धैर्य, आत्मविश्वास और मानसिक संतुलन की भी परीक्षा होती है। घबराना स्वाभाविक है, परंतु घबराकर हार मान लेना समाधान नहीं है। परीक्षा जीवन का एक चरण है, जीवन नहीं। डरने से नहीं, संतुलन से सफलता मिलती है।
प्रतिदिन कुछ समय योग, प्राणायाम और ध्यान को दें। यह न केवल विद्यार्थी के शरीर को स्वस्थ रखेगा, बल्कि आपके मन को भी शांत करेगा। शांत मन ही विषय को गहराई से समझ सकता है और वही स्थायी ज्ञान बनता है।
याद रखें तनाव से नहीं, संतुलन से सफलता मिलती है। तुलना से नहीं, साधना से आगे बढ़ते हैं। डर से नहीं, आत्मविश्वास से विजय मिलती है। अपने लक्ष्य पर विश्वास रखें, नियमित अभ्यास करें और अपने स्वास्थ्य को अपनी सबसे बड़ी पूँजी मानें। सफलता निश्चित रूप से आपके कदम चूमेगी।
योगाचार्य ललित चौहान – इंटरनेशनल योग एवं वेलनेस एक्सपर्ट

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