ब्रजेश पोरवाल-एडीटर &चीफ टाइम्स ऑफ आर्यावर्त 7017774931
भरथना।धान की फसल कटने के लिए तैयार थी, लेकिन जिले में हुई बेमौसम भीषण बरसात ने न केवल फसलों को चौपट कर दिया बल्कि किसानों के सपनों को भी मिट्टी में मिला दिया। इसके बावजूद सरकार ने अब तक न तो नुकसान का सर्वे कराया और न ही मुआवजे का एलान किया। इस रवैये के खिलाफ किसान सभा पदाधिकारियों ने गुरुवार को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार दिलीप कुमार को सौंपा।
किसान सभा के पूर्व कोषाध्यक्ष कामरेड अनिल दीक्षित ने कहा कि सरकार की किसान विरोधी नीतियों के चलते किसानों की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि चौथाई किसानों की फसल बिकने के बाद खोले गए सरकारी खरीद केंद्र सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। मानक के नाम पर किसानों का धान नहीं खरीदा जा रहा, जिससे किसान अपनी उपज को सरकारी रेट के आधे मूल्य पर बेचने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने का वादा करने वाली सरकार आज किसानों पर हंटर चला रही है। महीन धान का दाम जो तीन वर्ष पहले 5,000 रुपये प्रति कुंतल था, वह अब मात्र 2,200 रुपये में बिक रहा है, जबकि शासन-प्रशासन आंखों पर पट्टी बांधे बैठा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द सुधार नहीं किया तो किसान सभा सरकारी खरीद केंद्रों का घेराव कर किसानों का धान खरीदने के लिए मजबूर करेगी।
किसान सभा इटावा के उपाध्यक्ष शिवराम सिंह यादव ने कहा कि डीएपी की भारी किल्लत के चलते किसान दिनभर लाइन में लगकर भी एक बोरी खाद नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। सरकार बफर स्टॉक का झूठा एलान कर किसानों को गुमराह कर रही है। उन्होंने मांग की कि किसानों को आवश्यकतानुसार डीएपी और यूरिया खाद उपलब्ध कराई जाए।
इस दौरान प्रधान आपेन्द्र कुमार, सुरेश सिंह, रामप्रकाश यादव, रामनारायण, सुरेश चन्द्र, दुर्गविजय सिंह, इंद्रेश बाबू, प्रदीप कुमार, रामकृष्ण, चन्द्रभान, भारत सिंह आदि मौजूद रहे।
