ब्रजेश पोरवाल-एडीटर &चीफ टाइम्स ऑफ आर्यावर्त 7017774931
इटावा: इटावा के विशेष न्यायाधीश (POCSO)/अपर सत्र न्यायाधीश विनीता बिमल की अदालत ने आज यानी 22 सितंबर 2025 को सामूहिक दुष्कर्म के एक बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने रूपचन्द्र उर्फ मोनू पुत्र रामचन्द्र और पुष्पेंद्र यादव उर्फ रोमी पुत्र रंजीत, निवासी ग्राम मानिकपुर बिशुन, थाना इकदिल, जनपद इटावा को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
यह मामला अपराध संख्या-181/2021, थाना इकदिल, जनपद इटावा से संबंधित था। अभियुक्तों पर आईपीसी की धारा 376D (सामूहिक दुष्कर्म), 342, 323, 34 और POCSO अधिनियम की धारा 5G/6 के तहत गंभीर आरोप लगे थे।
पीड़िता के बयान में विरोधाभास
अदालत में पेश साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का विश्लेषण करने पर कई विरोधाभास सामने आए। पीड़िता ने मुख्य परीक्षा में स्पष्ट रूप से कहा कि अभियुक्तों ने उसके साथ कोई अपराध नहीं किया। यही आधार बचाव पक्ष ने अपने दलीलों में पेश किया।
बचाव पक्ष की रणनीति और सफलता
इस मामले में बचाव पक्ष के अधिवक्ता अखलेश कुमार यादव की कानूनी रणनीति और साक्ष्य पेश करने की कुशलता निर्णायक रही। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को प्रमाणित करने में विफल रहा और साक्ष्यों तथा गवाहों की स्थिति के आधार पर अभियुक्तों को दोषमुक्त किया गया।
वादी मुकदमा पर भी कार्रवाई का संकेत
अदालत ने वादी द्वारा विरोधाभासी गवाही देने को गंभीरता से लिया। अदालत ने कहा कि इसके खिलाफ धारा 22, POCSO अधिनियम के तहत संज्ञान लिया जाएगा और वादी से पूछा जाएगा कि क्यों न उन्हें गलत साक्ष्य देने के लिए दंडित किया जाए।
अदालत का निर्देश
अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि इस प्रकरण में केवल ‘पीड़िता’ शब्द का ही प्रयोग होगा और उसकी पहचान किसी भी रूप में उजागर नहीं की जाएगी।
निष्कर्ष
22 सितंबर 2025 को खुले न्यायालय में सुनाए गए इस फैसले ने सामूहिक दुष्कर्म के मामले में न्यायपालिका की साक्ष्य-आधारित और निष्पक्ष प्रक्रिया को सामने रखा। इस सफलता में अखलेश कुमार यादव की कानूनी पेशकश विशेष रूप से सराहनीय रही।
असित यादव इटावा संवाददाता
