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कृषि वैज्ञानिकों ने आधुनिक तकनीक, कम्पोस्ट खाद और फसल मूल्यवर्धन पर दिया जोर
भरथना। ब्लाक परिसर में आयोजित विकास खंड स्तरीय रवि कृषि निवेश मेला में किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों, मृदा संरक्षण और जैविक खेती के लाभों से रूबरू कराया गया। मेले में मौजूद कृषि विज्ञानियों और अधिकारियों ने किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और व्यावहारिक समाधान बताए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कृषक महिलाओं और पुरुष किसानों की सहभागिता रही।
मेले को संबोधित करते हुए डीडीए आर. एन. सिंह ने किसानों को फसलों की समय से बुआई करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समय पर बुआई करने से उत्पादन के साथ-साथ फसल का बेहतर बाजार मूल्य भी प्राप्त होता है। जनपद में टमाटर की अधिक पैदावार का उल्लेख करते हुए उन्होंने किसानों को मशीनों के माध्यम से टमाटर सॉस व अन्य उत्पादों का प्रसंस्करण कर बाजार में सप्लाई करने का सुझाव दिया, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सकती है।
महिला किसानों को संबोधित करते हुए डीडीए ने पारंपरिक खेती की ओर लौटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तुरैया, हरी मिर्च, धनिया, लहसुन और प्याज जैसी सब्जियों को कम्पोस्ट खाद के प्रयोग से उगाया जाए। इससे घरेलू खर्चों में कमी आएगी, भोजन शुद्ध रहेगा और स्वाद भी बेहतर होगा। साथ ही रासायनिक खादों और जहरीली दवाओं के प्रयोग से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए कहा कि इनके अत्यधिक उपयोग से गिद्ध, गौरैया, तोता, चिड़िया सहित अन्य जीव-जंतु नष्ट हो रहे हैं। अधिक से अधिक जैविक व कम्पोस्ट खाद के उपयोग से न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, बल्कि फसलों में रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी।
कृषि निवेश मेले में पूर्व अपर उद्यान अधिकारी हरेन्द्र यादव, कृषि वैज्ञानिक प्रकाश नारायण त्रिपाठी, एडीओ एजी दिलीप कुमार, रघुपाल सिंह, चन्द्रशेखर, विजय पाल, दिनेश कुमार, सचिन, देवेश प्रताप सिंह, करिश्मा, सुरेन्द्र पाल सिंह, संजय पाल सहित अनेक कृषि विशेषज्ञ उपस्थित रहे। अधिकारियों ने विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से किसानों को योजनाओं, बीज, उर्वरक, फसल संरक्षण और सरकारी सहायता से जुड़ी जानकारी भी उपलब्ध कराई।
मेले के समापन पर किसानों ने कहा कि इस तरह के आयोजनों से उन्हें नई तकनीकों और जैविक खेती के प्रति जागरूकता मिलती है, जिससे खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
